माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के बारे में रोचक बाते [Facts About Mount Everest Climbing]

Mount Everest Climbing Facts in Hindi

दुनिया में बहुत सारे साहसिक लोग हमेशा जीवन में एक रोमांचकारी नई गतिविधि की तलाश में रहते हैं। माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई करना बहुत ही रोमांचक विकल्प होता है। माउंट एवरेस्ट समुद्र तल से पृथ्वी का सबसे ऊँचा पर्वत है, इसलिए चढ़ाई करने के लिए एवरेस्ट सबसे खतरनाक पर्वत में से एक है और एवरेस्ट पर चढ़ना जोखिमों से भरा सफ़र है। यहा पर आप जानेगे माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के बारे में बहुत सारी जानकारी, जिसे जानकार आपको मज़ा आएगा क्यूकी चढ़ाई करना बहुत ही रोमांच भरा सफ़र रहता है। माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई से संबंधित कुछ खास जानकारी और तथ्य इस पोस्ट में बताए गये है – Mount Everest Climbing Facts & Other Information in Hindi

माउंट एवरेस्ट 29,029 फीट की ऊंचाई पर स्थित धरती पर किसी भी चीज से अधिक उँचा पर्वत है। माउंट एवरेस्ट तिब्बत में चीन और नेपाल की सीमा पर स्थित है, इसकी चढ़ाई के दौरान माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप में पहुंचने से कुछ दिन पहले ल्हासा और शिगात्से में घूमना एक बेहतर विकल्प हैं।

अगर आप को ऐसि गतिविधि में कोई दिलचस्प नही है फिर भी माउंट एवरेस्ट के बारे में पढ़ कर आपको मज़ा आएगा।

Mount Everest Climbing Facts

  • माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले लोग आमतौर पर मई के मध्य और कभी-कभी नवंबर के दौरान अपनी चढ़ाई की योजना बनाते हैं। इस समय को शिखर खिड़की (समिट विंडो) कहा जाता है।
  • 29,029 फीट की ऊंचाई पर, ली जाने वाली प्रत्येक सांस में ऑक्सीजन की मात्रा का केवल एक तिहाई हिस्सा होता है।
  • सफेद बर्फ पर प्रकाश का प्रतिबिंबित बहुत ही तेज हो सकता है इसलिए बर्फ के चश्मे (स्नो ग्लासस) को लेके जाना ट्रैकर के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
  • पहाड़ की जलवायु शुष्क और सर्द होने के कारण त्वचा के सूखने और गलने की संभावना रहती है। इसलिए ट्रैकर अपने साथ मॉइस्चराइजर क्रीम लेकर जाते है।
  • जब उच्च ऊंचाई पर जाने की बात आती है, लहसुन वास्तव में सहायक घटक होता है जो क़ी खाने की चीज़ो में शामिल किया जाता है, क्योंकि लहसुन रक्त को पतला बनाता है।
  • सभी शिविरों में से सबसे पहला लगभग 19,500 फीट की ऊंचाई पर है। यहा पर ट्रैकर एक रात बिताते है क्योंकि उनका शरीर नई जलवायु और ऊंचाई के साथ अनुकूल हो जाता है।
  • एक बार जब ट्रैकर कैम्प 3 तक पहुंच जाते हैं, तो ट्रैकर को ऑक्सीजन मास्क पहनना पड़ता है क्योंकि वहा पर हवा में ऑक्सिजन की कमी होने लग जाती है।
  • जब पहाड़ के शिखर पर पहुंचने का समय आता है, तो मौसम अविश्वसनीय रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। शिखर पर सबसे सुरक्षित, सबसे सफल चढ़ाई करने के लिए, ट्रैकर को 5 दिनों के लिए साफ आसमान और न्यूनतम हवाओं वाले वातावरण की आवश्यकता होती है
  • समुद्र तल से 29,029 फीट ऊपर, एक बार जब ट्रैकर शिखर पर पहुंच जाते हैं, तो पहाड़ के इस बिंदु पर ट्रैकर इस अविश्वसनीय उपलब्धि का आनंद लेते हैं और वास्तव में महसूस करते हैं कि वे दुनिया के शीर्ष पर हैं लेकिन सिर्फ आधे घंटे के लिए।

Climbing to the top demands strength, whether it is to the top of Mount Everest or to the top of your career

A. P. J. Abdul Kalam

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