क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) क्या होती है?

Cryptocurrency in Hindi

किसी व्यक्ति विशेष या कंपनी और हर किसी देश को अपनी मूल ज़रूरतो को पूरा करने हेतु धन राशि का लेनदेन करने के लिए एक मुद्रा या करेंसी की आवश्यकता होती है इसलिए हर देश की अलग-अलग करेन्सी होती है जैसे रुपया, डॉलर आदि जोकि एक फिज़िकल यानी भौतिक रूप में होती है, लेकिन एक करेन्सी ऐसी भी होती है जो डिजिटल रूप में होती है जिसका मुद्रण फिज़िकल यानी भौतिक रूप में संभव नही हो पाता है, इस पोस्ट में इसी डिजिटल करेन्सी या मुद्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी है – Cryptocurrency in Hindi

1. Cryptocurrency kya hai – What is Cryptocurrency in Hindi?
2. Cryptocurrency kitne prakar/tarah ki hai – Types of Cryptocurrency
3. Cryptocurrency ke fayde/labh – Benefits/Advantages of Cryptocurrency in Hindi?
4. Cryptocurrency ke nuksan/nuksaan – Disadvantages of Cryptocurrency in Hindi?
5. Kya Bitcoin legal hai – Is cryptocurrency legal in India in Hindi?

इस डिजिटल करेंसी को ना हम देख सकते हैं, और ना ही छू सकते हैं, और इसे वर्चुयल यानी आभासी मुद्रा (Virtual Currency or Virtual Money) भी कहते है जो पिछले कई सालों से इंटरनेट की दुनिया में काफ़ी प्रचलित हो रही है।

Cryptocurrency in Hindi – क्रिप्टो करेंसी क्या है?

एक डिजिटल असेट या परिसंपत्ति, जिसको धन के लेनदेन यानी एक्सचेंज के ज़रिए के रूप में काम में लेने के लिए बनाया गया है जिसमें किसी के व्यक्तिगत पैसो के मालिकाना हक के डेटा रिकॉर्ड को कंप्यूटराइज़ डेटाबेस के रूप में एक ख़ास खाता बही में रखा जाता है, Cryptocurrency कहलाती है और इसके लेनदेन के रिकॉर्ड डेटा को सुरक्षित रखने के लिए, अतिरिक्त क्रिप्टो करेंसी के निर्माण को नियंत्रित करने और क्रिप्टो करेंसी स्वामित्व के हस्तांतरण यानी ट्रान्स्फर को सत्यापित करने के लिए क्रिप्टोग्राफी (Cryptography or Cryptology) का इस्तेमाल होता है।

क्रिप्टोक्यूरेंसी, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले कागज के पैसे की तरह की भौतिक मुद्रा नहीं होती है और इस करेन्सी को किसी केंद्रीय प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं किया जाता है, क्रिप्टोकरेंसी केंद्रीयकृत डिजिटल मुद्रा और केंद्रीय बैंकिंग प्रणालियों के विपरीत विकेंद्रीकृत नियंत्रण का उपयोग करती है। ब्लॉकचैन तकनीक पर आधारित विकेंद्रीकृत नेटवर्क वाली कई सारी क्रिप्टो करेंसी है जिनका कंप्यूटर के एक असमान नेटवर्क द्वारा लागू एक वितरित खाता-बही में डेटा रेकॉर्ड होता है। विनिमय यानी धन के लेनदेन के तरीके के रूप में क्रिप्टोकरेंसी काम करती है जैसे बिटकॉइन और लिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी ही हैं।

सबसे पहले 2009 में शुरू हुई पहली क्रिप्टोकरेंसी का नाम बिटकॉइन (Bitcoin) था, जिसे जापान के सातोशी नाकामोटो नामक एक इंजीनियर ने बनाया था। शुरूवात में, यह करेन्सी ज़्यादा लोकप्रिय नहीं हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ इसकी दर काफ़ी बढ़ गयी, जिससे यह करेन्सी सफल हो पाई, 2009 से लेकर अब तक मार्केट में कई प्रकार की क्रिप्टोकरेंसी उपलब्ध हैं, जो सिर्फ़ इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के रूप में ही काम करती हैं। बिटकॉइन के अलावा भी कई अन्य क्रिप्टोकरेंसी मौजूद हैं जिनका उपयोग बहुत अधिक हो रहा है, क्रिप्टोकरेंसी कितने प्रकार की होती है? इसकी जानकारी नीचे दी गयी है। 

Types of Cryptocurrency – क्रिप्टो करेंसी के प्रकार

क्रिप्टोक्यूरेंसी नामक डिजिटल मुद्रा के कई अलग-अलग प्रकार होते हैं जिनको विनिमय के माध्यम के रूप में काम में लेने के लिए डिज़ाइन किया गया है, उन्ही में से कुछ ज़्यादा प्रचलित क्रिप्टोक्यूरेंसी इस प्रकार है –

1. बिटकॉइन (BTC)

सबसे अधिक प्रचलित डिजिटल मुद्राओं में से एक है बिटकॉइन, जिसे एक मूल क्रिप्टोक्यूरेंसी माना जाता है, 2009 में एक ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में इस डिजिटल मुद्रा को स्थापित किया गया था। ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बिटकॉइन उपयोगकर्ताओं को पारदर्शी सहकर्मी-टू-सहकर्मी लेनदेन करने की अनुमति देता है और सभी उपयोगकर्ता इसके लेनदेन को देख सकते हैं जो ब्लॉकचेन के अंतर्गत निहित एल्गोरिथ्म के माध्यम से सुरक्षित होती हैं। बिटकॉइन में कोई भी केंद्रीय प्राधिकरण का आंकड़ा नहीं होता है, जैसे बैंक में होता है, बिटकॉइन उपयोगकर्ता ही पैसे भेजने और प्राप्त करने को नियंत्रित करते हैं, जिससे गुमनाम लेनदेन दुनिया भर में हो पाता हैं।

2. लिटकोइन (LTC)

बिटकॉइन क्रिप्टोकरेंसी के विकल्प के रूप में 2011 में लीटेकॉइन को लॉन्च किया गया था। लीटेकॉइन भी एक ओपन-सोर्स, वैश्विक भुगतान वाला नेटवर्क है जो पूरी तरह से विकेंद्रीकृत है, यानी इसमे कोई केंद्रीय अधिकारी नहीं होता है। बिटकॉइन और लीटेकॉइन डिजिटल मुद्राओं के बीच कुछ सामान्य अंतर इस प्रकार हैं –

  • लीटेकॉइन को की तुलना में बहुत तेजी से लेन-देन के समय की सुविधा मिलती है।
  • बिटकॉइन के लिए कोइन सीमा 21 मिलियन और लिटकोइन 84 मिलियन होती है।
  • दोनो ही अलग-अलग एल्गोरिदम पर काम करते हैं।
  • लिटकोइन का एल्गोरिदम “scrypt” और बिटकॉइन का एल्गोरिदम “SHA-256” है।

3. एथेरियम (ETH)

एथेरियम भी एक प्रकार का क्रिप्टोक्यूरेंसी है जिसको 2015 में बनाया गया था और जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित एक ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म है। डिजिटल मुद्रा लेनदेन के स्वामित्व पर नज़र रखने के दौरान, Ethereum ब्लॉकचेन किसी भी विकेन्द्रीकृत एप्लिकेशन के प्रोग्रामिंग कोड को चलाने पर भी ध्यान केंद्रित करता है, जिससे इसे Ethereum नेटवर्क पर लेनदेन शुल्क और सेवाओं का भुगतान करने के लिए एप्लिकेशन डेवलपर्स द्वारा उपयोग किया जा सकता है।

4. रिपल (XRP)

रिपल नामक क्रिप्टोक्यूरेंसी को 2012 में जारी किया गया था, जो वित्तीय लेनदेन के लिए एक डिजिटल भुगतान नेटवर्क के रूप में काम करती है। यह एक वैश्विक निपटान नेटवर्क है जिसे पैसे ट्रांसफर करने का तेज़, सुरक्षित और कम लागत वाला तरीका बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया था रिपल USD और बीटकोइन से लेकर सोने और EUR तक किसी भी प्रकार की मुद्रा का आदान-प्रदान करने की अनुमति देती है, और यह अन्य मुद्राओं के विपरीत, बैंकों से जुड़ती है। रिपल अन्य प्रकार की डिजिटल मुद्राओं से अलग है क्योंकि इसकी प्राथमिकता व्यक्ति-से-व्यक्ति के लेन-देन के लिए नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर पैसे को चलाने के लिए है।

5. बिटकॉइन Cash

बिटकॉइन कैश भी एक प्रकार की डिजिटल मुद्रा ही है जिसे बिटकॉइन की कुछ विशेषताओं को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया था। बिटकॉइन कैश से ब्लॉकों के आकार में वृद्धि हुई, और जिससे ज़्यादा से ज़्यादा लेनदेन को तेजी से संसाधित किया जा सकता है।

6. एथेरियम Classic

Ethereum क्लॅसिक, Ethereum ब्लॉककचान का एक संस्करण है जो एक समान विकेन्द्रीकृत मंच पर स्मार्ट तरीके से अनुबंध चलाता है। स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स ऐसे एप्लिकेशन होते हैं जो डाउनटाइम, सेंसरशिप, फ्रॉड या थर्ड-पार्टी इंटरफ़ेस की किसी भी संभावना के बिना प्रोग्राम किए जाते हैं। एथेरियम की तरह यह “क्लासिक ईथर” नामक एक टोकन प्रदान करता है, जिसका उपयोग उपयोगकर्ताओं को उत्पादों या सेवाओं के लिए भुगतान करने के लिए किया जाता है।

7. Zcash (ZEC)

Zcash एक ऐसी डिजिटल मुद्रा है जिसे मूल रूप से बिटकॉइन कोडबेस पर ही बनाया गया था। एमआईटी, जॉन्स हॉपकिंस और अन्य सम्मानित शैक्षणिक व वैज्ञानिक संस्थानों के वैज्ञानिकों द्वारा इसकी कल्पना की गई थी, जिसे एक विकेंद्रीकृत ब्लॉकचैन पर बनाया गया था। Zcash की एक मुख्य विशेषता इसकी गोपनीयता है, जबकि इक्विटी ट्रस्ट के प्लेटफ़ॉर्म पर निवेशकों के लिए इसका फ़ंक्शन उपलब्ध नहीं है, उपयोगकर्ता प्रेषक, रिसीवर या लेनदेन की गई राशि का खुलासा किए बिना Zcash को भेज और प्राप्त कर सकते हैं।

8. स्टेलर लुमेन (XLM)

स्टेलर लुमेन एक मध्यस्थ मुद्रा है जो मुद्रा विनिमय की सुविधा देती है। स्टेलर एक उपयोगकर्ता को किसी भी मुद्रा को किसी अन्य मुद्रा में भेजने की अनुमति देता है। Jed McCaleb ने ओपन-सोर्स नेटवर्क स्टेलर की स्थापना की, और 2014 में इस नेटवर्क की मूल मुद्रा ‘स्टेलर लुमेन (XLM)’ बनाई थी।

9. बिटकॉइन SV

बिटकॉइन SV (Bitcoin Satoshi’s Vision/BSV) बिटकॉइन कैश के 2018 विभाजन का परिणाम है। यह बिटकॉइन के मूल उद्देश्य से अधिक निकटता से संबंधित है, विशेष रूप से विकेंद्रीकरण और भुगतान के रूप में क्रिप्टोक्यूरेंसी का उपयोग करना, इसे बनाने का मकसद है।

10. Cardano

कार्डानो एक विकेन्द्रीकृत सार्वजनिक ब्लॉकचेन और क्रिप्टोक्यूरेंसी परियोजना है और पूरी तरह से ओपन स्रोत तकनीक पर आधारित है। कार्डानो एक गैर-लाभकारी प्लॅटफॉर्म है जिसके तीन अलग-अलग निकाय हैं जो प्लेटफॉर्म को बनाए रखने और विकसित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

Advantages of Cryptocurrency – क्रिप्टो करेंसी के फायदे

क्रिप्टोकरेंसी में बिचौलियों का कोई काम नहीं होता हैं, इसलिए इसका लेनदेन आमतौर पर आसान और तेज होता हैं, और इसके लिए कोई अतिरिक्त लेनदेन शुल्क की आवश्यकता होती है। क्रिप्टोक्यूरेंसी में लोगों को “शक्ति वापस देने” की क्षमता होती है। इसके अलावा क्रिप्टोक्यूरेंसी के फायदे इस प्रकार है –

  • क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल मुद्रा है इसलिए इसके लेनदेन में धोखाधड़ी बहुत कम है।
  • ज़्यादा पैसा होने पर इसमे निवेश करना लाभदायक साबित हो सकता है क्योंकि इसकी कीमते बहुत तेज़ी से बढ़ती है।
  • हर क्रिप्टोकरेंसी के ऑनलाइन वॉलेट उपलब्ध होते हैं जिससे ऑनलाइन शॉपिंग, ऑनलाइन पैसो का आदान-प्रदान आसान है।
  • क्रिप्टोकरेंसी को किसी भी अथॉरिटी के द्वारा नियंत्रित नहीं किया जाता है जिससे नोटबंदी या फिर मुद्रा का मूल्य कम होने का खतरा नही होता है।
  • बहुत से देशो में कैपिटल कंट्रोल नहीं होता है, ऐसे में किसी भी देश के बाहर कितना भी पैसा भेज सकते है।
  • जो लोग अपना पैसा छुपाकर रखना चाहते है, उनके लिए क्रिप्टोकरेंसी के रूप में पैसे छुपाकर रखने के लिए प्लेटफॉर्म मिल जाता है।
  • क्रिप्टोकरेंसी हर तरह से सुरक्षित होती है।

Disadvantages of Cryptocurrency – क्रिप्टो करेंसी के नुकसान

हर वस्तु के फायदे और नुकसान दोनों होते है, Cryptocurrency के फायदे के बारे में उपर बताया गया है और Cryptocurrency के नुकसान क्या-क्या है? यह नीचे बताया गया है –

  • क्रिप्टोकरेंसी का कोई भी भौतिक अस्तित्व नहीं होता है, और इसका मुद्रण नहीं होता है यानी इस मुद्रा के नोट प्रिंट नही होते हैं और कोई भी बैंक इसके लिए अकाउंट नही खोलता है।
  • इस मुद्रा को नियंत्रित करने के लिए कोई भी संस्था नहीं होती है जिससे इसकी कीमत में उछाल और गिरावट चलता रहता है, जो क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते है उनके लिए यह जोखिम भरा हो सकता है।
  • इस प्रकार की मुद्रा का इस्तेमाल गैर-क़ानूनी कामों जैसे हथियार की खरीद, ड्रग्स की सप्लाई, कालाबाजारी आदि में बहुत ही आसानी से किया जा सकता है।
  • यह डिजिटल मनी होती है इसलिए इसको इंटरनेट पर हैक करने की संभावना हो सकती है।
  • यदि ग़लती से इस मुद्रा का ट्रांजैक्शन हो जाता है तो इसे रिटर्न नहीं ले सकते है।

Cryptocurrency Legal or Illegal – क्या क्रिप्टो करेंसी वैध है?

क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करना कुछ देशो में कानूनी रूप से वैध है तो कुछ देशो में वैध नही है यानी अभी तक कई देशो में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं हुई है, भारत में भी यह मुद्रा वैध नही है, और कई देशो में इस मुद्रा को ‘ग्रे जोन’ में रखा गया है यानी इस मुद्रा (Cryptocurrency) को औपचारिक तौर पर बैन किया हुआ है।

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