भारत की 5 बड़ी कंपनियां जिन्होने छोटे व्‍यवसाय (Small Business) से शुरूवात की थी?

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भारत में व्यवसाय के अवसरो की बिल्कुल भी कमी नही है, यहा पर सरकार छोटे से लेकर बड़े स्तर तक व्यापार शुरू करने के लिए, कई योजनाओ के तहत लोगो को प्रोत्साहन और मदद देती है भारत में छोटे व्यवसायों के (start small grow big) कई शानदार उदाहरण हैं जो आज बहुत बड़े व्यावसायिक समूह बन गये है, उन्ही में से कुछ बिज़्नेस ग्रूप्स (Top 5 Indian Companies) की जानकारी इस पोस्ट में दी गयी है।

top 5 indian companies

Top 5 Indian Companies that Start Small Business

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज
  • डाबर इंडिया लिमिटेड
  • टाटा सन्स
  • निरमा ग्रूप
  • संजय घोड़ावत ग्रूप

इन पाँचो कंपनीयो के समूहो में अपने व्यापार के शुरूवाती समय में एक छोटे स्तर पर काम को चालू किया था यानी छोटा बिज़्नेस शुरू किया था, (Start Small Business) लेकिन आज समय के साथ- साथ ये पाँचो छोटे बिज़्नेस, बड़ी कंपनियो और बड़े इंडस्ट्रीस ग्रूप्स में तपदील हो चुके है व लगातार भारत में और भारत के बाहर अपनी सर्विस प्रदान कर रहे है।

Start Small Grow Big

रिलायंस के संस्थापक धीरूभाई अंबानी ने मात्र 15,000 रुपये की पूंजी लगाकर अपने व्यापार की शुरूवात की थी लेकिन सन् 1973 में यह राशि काफ़ी बड़ी थी। आज, रिलाइयन्स इंडस्ट्रीस लिमिटेड एक भारतीय बहुराष्ट्रीय समूह की कंपनी है जिसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में है। रिलायंस ग्रूप पूरे भारत में ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, वस्त्र, प्राकृतिक संसाधन, खुदरा और दूरसंचार में कारोबार करता है।

कोलकाता के एक आयुर्वेद चिकित्सक एसके बर्मन ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सस्ती हर्बल दवाइयाँ उपलब्ध करवाने के मकसद से डाबर इंडिया लिमिटेड की शुरूवात बहुत ही कम लागत से 1884 में की थी, जो कि आज दुनिया की सबसे बड़ी आयुर्वेदिक और प्राकृतिक स्वास्थ्य उत्पादो में कारोबार करने वाली कंपनी है।

टाटा ग्रूप एक विशालकाय भारतीय बिज़्नेस समूह है जिसकी शुरूवात 1800 के दशक में हुई थी, रतनजी दादाभाई टाटा ने चीन से अफीम का आयात करके व्यापार को शुरू किया और बाद में टाटा परिवार ने कपास व्यापार और विनिर्माण के बिज़्नेस में प्रवेश किया, इस प्रकार टाटा सन्स आज सबसे अमीर और सबसे बड़ा भारतीय इंडस्ट्रियल समूह बन गया हैं।

करसनभाई पटेल ने डोर-टू-डोर जाकर 3 रु/किलो से डिटर्जेंट पाउडर बेचना शुरू किया जबकि उसी डिटर्जेंट पाउडर की बाजार दर लगभग 13 रु/किलो थी। इस प्रकार सन् 1990 में नीरमा ग्रूप की शुरूवात एक छोटे व्यवसाय के रूप में हुई थी।

संजय घोडावत ने 1980 के दशक में कुटीर उद्योग के रूप में गुटखा या चबाने योग्य तंबाकू उत्पाद बनाने से छोटे व्यापार की शुरूवात की थी, आज संजय घोड़ावत ग्रूप अन्य कई क्षेत्रों जैसे सौर ऊर्जा, खाद्य उत्पादों, शिक्षा आदि में शीर्ष पर है।

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1 COMMENT

  1. बहुत ही रोचक जानकारी ,इन बिज़नेस मैन को मिली कामयाबी से अत्यधिक प्रेरणा मिलती है ,की कैसे इतनी छोटी पूंजी से सिर्फ 40 साल में इतना बड़ा व्यापार खड़ा कर लिया।

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